Thursday, January 1, 2015

२९ दिसम्बर २०१४ का चित्र और भाव



दीपक अरोड़ा
~अलविदा 2014 स्वागतम 2015~

आओ नववर्ष का स्वागत करें
इस साल को अलविदा कहते हुए
अमीरों का बीता खुशियों के साथ
गरीबों का महंगाई की मार सहते हुए

बीता वर्ष बिछड़ जाएगा कई यादों के साथ
संकल्प लेंगे अब नववर्ष पर नए वादों के साथ
किसी को न सताएंगे सब पर स्नेह लुटाएंगे
दीजिए हाथों में हाथ, पक्के इरादों के साथ

ईश्वर की देन है ये उधार की जिंदगी
इसे उसकी इच्छानुसार ही जीएंगे
दूसरों के लबों पर लाने को मुस्कान
अपने जख्मों को हम खुद ही सीएंगे



नैनी ग्रोवर 
----- ले जा------

जा रहा है तो दर्द भरी मुलाक़ात ले जा,
जहाँ भर का गम भी, साथ ले जा..

मासूम चीखों से दहल उठा आसमान था,
उनकी माओं के सीने का चीत्कार ले जा..

अब ना हो किसी बहु बेटी पे कोई ज़ुल्म,
जाते जाते ये लफ्ज़, बलत्कार ले जा..

जो किसी के दिल को दुखा दे,
ऐ नव वर्ष, लबों से छीन के वो बात ले जा ..!!



प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल 
~हाँ मैं~
हाँ मैं दोषी हूँ
हाँ मैं भी दोषी हूँ
हाँ हम सब दोषी है
समाज के देश के
हर अपराध की भेंट चढी
किसी मासूम की आत्मा की
जिसके लिए सडको पर
केवल दो दिन शोर मचाया
कैंडल लेकर पैदल मार्च किया
और फिर चुप हो कर बैठ गए
अगले अपराध के होने तक ....
या सुर्खिया बटोर ली
कहीं लिख कर, छापकर
कभी टीवी चैनल में बैठकर
सरकार, नेताओ को दोषी ठहराकर
क्या आप स्वय को दोषी मानते है ???



बालकृष्ण डी ध्यानी 
~इन हाथों में ~

इन हाथों में
देख वो अपना हाथ
उठा और दे दे तू अब
अपनों को साथ

हाथ अगर कई हों
पर सोच वो बस सही हो
ले चल अपने को
उन अपनों के साथ

आत्मा का परमात्मा से
हो जाये जब जब ये मिलन
रंग भेद से ऊपर उठ
वो लहरा दे शांती परचम

ना रहे कोई राग द्वेष
बस हम और अपना देश
वन्दे मातरम वन्दे मातरम
सवत्र हो सुजलांम् सुफलाम्

इन हाथों में
देख वो अपना हाथ
उठा और दे दे तू अब
अपनों को साथ


अलका गुप्ता 
अलविदा ! .....2014........!!!

नव वर्ष है !
नव संचार सब !
नव गीत हों !

फिर प्रसार ...!
कृपा अपरम्पार ...!
दे ईश साथ ...!

हों दूर विघ्न !
खुलें उन्नति द्वार !
भरे उल्लास !

हर्षित होवें !
धन धन्य से पूर्ण !
ले सद्विचार !



सभी रचनाये पूर्व प्रकाशित है फेसबुक के समूह "तस्वीर क्या बोले" में https://www.facebook.com/groups/tasvirkyabole/

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