Sunday, January 20, 2013

20 जनवरी 2013

(20/01/2013 का चित्र जिस पर निम्नलिखित भाव पेश किये सदस्यों के द्वारा )


अलका गुप्ता 

हममें ही थी... कुछ बात
कि हम ...उनके ना हुए |

समझा था हमने ...अपना
जिन्हें... वह अपने ना हुए |

अरे !.... नादान हम ही थे
क्यूँ रोते हैं अब ...लुटे हुए |

मुहब्बत ...कैसे देखेंगे वह !
चश्मा नफरत का पहने हुए ||

Dinesh Nayal 

बिन आईने हमने देखा था
इक तस्वीर धुँधली सी
मन में इक आस जगी
थी मगर वो बिखरी सी,
कसक जगी मन में
और टीस लगी इक हल्की सी,
होकर भी जो ना हो पाई
'दिनू' यादें थी वो सुनहरी सी


बालकृष्ण डी ध्यानी

मै बूढ़ा हूँ ....

ऐनक है ये
वो उपनेत्र है मेरे
कोई कहे चश्मा
मै बूढ़ा हूँ
वो नेत्र हैं मेरे

अग्रज शरीर
का बड़ा वो सहारा
दिन चार का
वो है किनार

लाठी है कभी तो
बन जाये समये की धार
पाखंडी के मेल से
अवधि संधि - स्थल का तारणहार

भूल जात हूँ रखकर
याद आता बारमबार है
सम्मोहन तंत्र का मंत्र
वो छुटा ऐनक हमारा

रोज़ दिवस वो साथ मेरे
अधुनिक युग का तारा
वो है जगत उजियार
इन कमजोर आँखों का प्यार

ऐनक है ये
वो उपनेत्र है मेरे
कोई कहे चश्मा
मै बूढ़ा हूँ
वो नेत्र हैं मेरे


संगीता संजय डबराल 

आज नफरत है चारों ओर
हर तरफ मैं मैं का शोर
तू छोटा मैं बड़ा
सबकी आँखों पर चढ़ा,
अहमं का चश्मा!

रिश्ते धुंधले धुंधले से
धीरे धीरे मिट रहे
हर कोई अपनी
जिद्द पर है अड़ा

सबकी आँखों पर चढ़ा,
अहमं का चश्मा!
प्यार को शक मिला
ममता को ना हक़ मिला
सख्त अहसास हो गये
मिजाज सबका ही कड़ा,
सबकी आँखों पर चढ़ा,
अहमं का चश्मा!
इंसानियत मर रही
आबरू, बाजार बिक रही
देख रहा तू तमाशा
मूक बनकर खड़ा,
सबकी आँखों पर चढ़ा
अहमं का चश्मा


सुनीता शर्मा 

सारी दुनिया एक रगीन सपना
देखने इसको न लगाना कपटी चश्मा
खुली आँखों दिखता हर कोई अपना
फ़रॆब करोगे तो फरेब दिखाता चश्मा
कमजोर नेत्रों वालो को जरूरी पहनना
भूलना मत होता उनका मित्र यह चश्मा
शरारती तत्वों की आँखों का सुंदर गहना
अपने छोटी मानसिकता छिपाते पहन चश्मा
फैशन के मारो का अनमोल खजाना
पेट हो भूखा पर आधुनिक दिखाता चश्मा
कलाकारों ,व् खिलाडियों की नकल करना
खूब सिखाता इतराना आपका यह चश्मा


नैनी ग्रोवर
प्रीत की ऐनक लगा के देखो, उंच-नीच की बदरी छँट जायेगी,
वरना समय वो दूर नहीं है, प्रलय से पहले प्रलय आ जायेगी !!


प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल 

मेरा चस्मा

मेरी सोच
मेरी उम्र
मेरा ज्ञान
मेरा अनुभव
बन गया मेरा चस्मा

हर विषय
हर मुद्दा
हर घटना
हर नीति
सब पर लगता मेरा चस्मा

स्वार्थ हावी
इंसानियत भूले
मानवता गुम
मानसिकता घिनौनी
देख टूट गया मेरा चस्मा


बालकृष्ण डी ध्यानी  

मतलब का चस्मा

मतलब का चस्मा
पहनकर आज मै इतराता हूँ

फूलों से सुगंध को भी
मै चोर लेता हूँ


भंवरो  को ना
पास एक पल मै सुहाता हूँ
कलियों को फूल
बनने से पहले मै मुरझाता हूँ

दिखे जो भी मै देखता जाता हूँ
ना दिखे तो भी कपटी मन देख ही जाता है
कला वर्ण है काला मन है मेरा
चस्मा भी काले रंग का लगाता हूँ

आँखों से रोटियां सेखता जाता हूँ
किसी के खाने से पहले चुपके से मै खा जाता हूँ
दाने - दाने में मै काला बाजारी करता हूँ
दो नैनो को इस चश्मे से अपने ढँकता हूँ

मतलब का चस्मा
पहनकर आज मै इतराता हूँ

फूलों से सुगंध को भी
मै चोर लेता हूँ



उदय ममगाईं राठी 

न ऐंठो इतना इस चढ़ती जवानी पर एक दिन हमारी कतार में रहोगे
हमें तो आज मिल भी गया, इस बढती आवादी में तुम कतार में रहोगे
लिखने का तो मन बहुत है लेकिन सब कुछ धुंधला अब दिखने लगा है
अरे बुढ़ापा क्यूँ तक़दीर को कोसते हो जो खुद कौड़ी के भाव बिकने लगा है
इस छोटे से कांच के टुकड़े ने कलयुग की जो तस्वीर हमें दिखाई है
जीवन के इस अंतिम पथ पर क्या विधि ने यही लेख लिखाई है

बलदाऊ गोस्वामी 

काँच से बनती है, नयन पर लगती है।
दो भाव में रहती है,सबको लुभाती है।।
मानस की दु:ख हरती है, अझरों की रुप बढा देती है।
धूप से बचाती है, प्रकाश का प्रवर्धन करती है।।
नयन पर सुशोभित होती है,चश्मा कहलाती है।
कवि 'गोस्वामी' यह कहता है,सब कोई यह जानता है।।
गोस्वामी काला चश्मा पहनता हूँ, काला धंधा करता हूँ।
यह एक चश्मा कहलाता है, चश्मा का दूसरा रुप कहलाता है।।
काला चश्मा पहने बैठा हूँ,भ्रष्टाचार की आँधी लाता हूँ।
सबको परेशान करता हूँ,अपना राज्य फैलाता हूँ।।


~प्रभा मित्तल~
चश्मा.....
मेरे जीवन का साथी,
मेरे नैनों की ज्योति,
इससे मैंने दुनिया देखी,
दुनिया के सब रंग देखे।
प्यार भरे वो मंजर देखे।

चश्मा.....
एक नज़र ऐसी भी लाया
हवा का रुख बदला पाया
नफ़रत की आँधी चलते देखी
स्वार्थ में डूबा संसार भी देखा
इंसानों की नीयत घटते देखी

चश्मा.....
यह तो मानव को दृष्टि देता है,
दोनों ही चेहरों पर रहता है,
चलें पहन कर जब इसको,
भेद-भाव औ बैर से हम दूर रहें।
सबकी नजरों में इंसान बनें।


सभी रचनाये पूर्व प्रकाशित है फेसबुक के समूह "तस्वीर क्या बोले" में https://www.facebook.com/groups/tasvirkyabole/

1 comment:

  1. शुभ प्रभात का वंदन गुरुवर ...........बस सुंदर अति सुंदर आप का प्रयास आप और हम साथ साथ ............चलतें चलें एक लक्ष्य को ले थम ......हम साथ साथ

    ReplyDelete

शुक्रिया आपकी टिप्पणी के लिए !!!